🙏जाने, किन मूलनायक प्रतिमा के साथ कौन कौनसे तीर्थंकर की प्रतिमाएं होनी चाहिए ।🙏

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👉आइए आज हम आपको जिस मन्दिर मे 1008 श्री
‘ ‘ आदिनाथ भगवान’ ‘
🙏की प्रतिमा मूलनायक के रूप मे विराजमान हो तो उस वेदी मे राशि तत्व एवं गुण मिलान के आधार पर
🚩वेदी मे कौन कौनसे तीर्थंकर की प्रतिमाएं विराजमान हो सकती है ? 👇

वैसे तो मन्दिर समवशरण एवं वेदी को भगवान की गन्धकुटी मानी गई है ।
👉इस आधार पर एक वेदी मे सिर्फ एक ही तीर्थंकर भगवान की प्रतिमा विराजमान होनी चाहिए । 💐
👉क्यो की भरत क्षेत्र मे एक समय मे सिर्फ एक ही तीर्थंकर भगवान का शमवशरण लगता है 🚩

⏭लेकिन अगर हम एक से अधिक तीर्थंकरों की प्रतिमाएं विराजमान करते है तो राशि तत्वों का मिलान कर लेना चाहिए ।
राशि तत्वों के मिलान के आधार पर
👇👇
मूलनायक 1008 श्री आदिनाथ भगवान की वेदी मे इन प्रतिमाओं के विराजमान होने पर नगर , समाज और विराजमान करने , कराने वालो के जीवन मे सुख समृद्धि बनी रहती है ।

अजीतनाथ जी , अभिनन्दन जी, अनन्तनाथ जी , अरहनाथ जी , मल्लिनाथ जी , मुनिसुव्रतनाथ जी और तीर्थंकर महावीर भगवान की प्रतिमाएं वेदी मे विराजमान होनी चाहिए । ✅

👉विकल्प के रूप मे 👇

🙏संभवनाथ जी , सुमति नाथ जी , सुपार्श्व्नाथ जी , शीतलनाथ जी , धर्मनाथ जी , शान्तिनाथ जी , कुन्थुनाथ जी तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाएं विराजमान कर लेनी चाहिए ।

👉इसी तरह अन्य मूलनायक भगवान की वेदी और अन्य वेदियों के मूलनायक प्रतिमाओं के भी राशि तत्वों के मिलान करना चाहिए । 🙏

👉विशेष – मन्दिर निर्माण से पहले नगर के नाम और दिशा के आधार पर ही
👇👇
👉मूलनायक का चयन
👉मन्दिर के मुख्य द्वार की दिशा का चयन
👉प्रतिमाओं की संख्या
👉प्रतिमाओं का चयन
👉वेदियों की संख्या
👉अन्य वेदियों के मूलनायक का चयन
👉 उन वेदियों मे प्रतिमाओं का चयन
कर लेना नगर , समाज और विराजमान करने व कराने वालो के हित मे होता है ।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏

वास्तु एवं ज्योतिष गौरव
राकेश जैन हरकारा , जयपुर
whatsapp – 9414365650
http://futurea2z.com/?

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